तुम्हरे कपोलों से लुढकते आसूं
मोती से नजर आते हैं मुझे
क्या पता यह नजरों का दोष है
या मै नही लगा पा रहा हूँ सही कीमत इनकी
तुम तो जानती हो की क्या हो सकती है कीमत इसकी
मेरे लिए
शब्द नही थे मेरे पास सो मोती कह दिया
जाने क्यों अनमोल नही कहना चाहता
सायद अनमोल में भी मोल तो है ही
अब लाचार हूँ मै इनकी कीमत व्यक्त करने में
मुझे रहने दो इस लाचारी में
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