तुम्हारी छुवन को
याद है मुझे वह पल जब
तुम मुझसे हाँथ मिलाकर
दोड़ती हुयी चढ़ गई ट्रेन पे
मै निहारता रहा
आखों से ओझल होती ट्रेन को
महसूस करते हुए तुम्हारे स्पर्श को
काश! की मै बयान कर सकता
तुम्हारे स्पर्श की अनुभूति
एक अदभुद दुनिया
एक अदभुद लोक
जहाँ न तुम हो न मै
है तो बस तुम्हारा स्पर्श
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